Principal Message

प्राचार्य की कलम से .........

मानव सभ्यता संस्कृति का विकास तथा आधुनिक तकनीकी क्रान्ति शिक्षा के परिणाम है। विकास राष्ट्र का ही नही विश्व का अभीष्ट है। इस समग्र एवं सर्वागीण विकास में मनुष्य साधन भी है और साध्य भी। साधन के रूप में मानवीय शक्ति संसाधन है और सम्पूर्ण विकास एवं उसके प्रतिफल मनुष्य के लिए है इस प्रकार साध्य है। मानवीय संसाधन यथा डाक्टर, इंजीनियर, वक्ता, प्रवक्ता, अधिवक्ता, नेता, अभिनेता, शासक एवं प्रशासक आदि देश के समग्र विकास की मुख्य धारा से जुड़े है और उसको सार्थकता प्रदान करते है। मनुष्य के इन विभिन्न रूपो के रूपान्तरण का आधार शिक्षा है।

प्राकृतिक साधन चाहे जितना प्रचुर मात्रा में विद्यमान क्यो न हो मनुष्य को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति एवं विकास के लिए कुछ न कुछ प्रयत्न अवश्य करना पड़ता है क्योकि प्रकृति के अन्य साधन निष्क्रिय होते है। जिन्हे सक्रिय एवं उपयोगी बनाने में मानव श्रम एवं तकनीकी ज्ञानशिक्षा का अत्यधिक योगदान है। भारत जैसे जनाधिक्य (ओवर पापुलेशन) राष्ट्र तथा इनमें अन्तर्निहित उत्पादन क्षमता एवं कार्यशीलता को राष्ट्र के समग्र विकास की ओर सतत प्रवाहित करने में शिक्षा का अत्यधिक महत्व है। कृषि क्षेत्र में हुयी सप्त क्रान्ति बगैर कृषि शिक्षा के सम्भव नही थी। औधोगिक विकास का कोर्इ भी प्रारूप बिना शिक्षा के साकार नही हो सकता था। पंचवर्षीय योजनाओं की कल्पना बगैर शिक्षा के नही की जा सकती है। सामाजिक सेवाओं का संचालन एवं तकनीकी ज्ञान जितना अधिक होगा, देश उतना ही उत्पादन एवं उत्पादकता के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा अर्थात जहां एक ओर राष्ट्रीय आय में वृद्धि, तकनीकी शिक्षा पर निर्भर करेगी वहीं दूसरी ओर पारिवारिक, सामाजिक व्यवस्था एवं राष्ट्रीय शासनप्रशासन नैतिक शिक्षा पर निर्भर करेगा।।

अत: व्यकित का शारीरिक मानसिक एवं बौद्धिक विकास, नैतिक एवं तकनीकी शिक्षा से होने पर वह राष्ट्र के लिए सबसे बड़ी पूँजी होगा। राष्ट्र के सर्वागीण विकास में शिक्षा का वही महत्व है जो अर्थव्यवस्था में मुद्रा का एवं मानव शरीर में रक्त का है। इन्ही उददेश्यो की पूर्ति हेतु प्रबन्धतंत्र द्वारा महाविद्यालय की स्थापना सन 2001 में की गयी।

Administration

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी

भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था

Read More
Background Image

स्वामी दयानन्द सरस्वती

महर्षि दयानन्द ने चैत शुक्ल प्रतिपदा संवत 1932 सन 1875 को गिरगांव मुम्बर्इ में आर्य समाज की स्थापना की।

Read More
Background Image

प्राचार्य की कलम से ....

मानव सभ्यता संस्कृति का विकास तथा आधुनिक तकनीकी क्रानित शिक्षा के परिणाम है।

Read More
Facebook
Google+
Contact Us
  • Address -KHAIPAR ROAD, MARDAN NAKA,
    BANDA (U.P.)
  • E-mail :info@rgdcollege.org
  • Phone No. - 05192-225221
  •  
  •  
  •  
  •